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चीज़ॉं के दाम आसमान छू रहे हैं. सरकार हमें मांग और आपूर्ति का नियम समझा रही है और हम हैं कि समझ रहे हैं. जमाखोर और कालाबाज़ारिये कमा-कमा कर लाल हो रहे हैं. सत्ता और विपक्ष दोनों इस मसले पर लंबी ताने सो रहे हैं. आप कहते हैं कि हम कर क्या सकते हैं? अजी जनाब! अपराधियों और भ्रष्ट जनों के पास पूरे देश की सुख समृद्धि सोख लेने वाली जो स्पिरिट है, अगस्त्य मुनि से प्रेरणा लेकर उसी चेतना का सदुपयोग आप इन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए कर सकते हैं. कुछ नहीं, तो बेईमान नेताओं को ऐसा एक समूह होने की सूचना तो दी ही जा सकती है.......
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