यूनिसेफ द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस को बालमित्र पुलिस के रूप में चिन्हित कर प्रसंशा किया जाना
दिनांक 20.11.2009 को विश्व, संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारित बच्चों के अधिकार के विशेष अधिवेशन की 20वीं वर्षगाँठ मना रहा है। संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा नवम्बर 1989 में बच्चों के अधिकार के सम्बन्ध में घोषणा पारित की गयी थी जो सम्पूर्ण विश्व में बच्चों के अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रभावी विधिक प्रबन्ध है। यह अधिवेशन बच्चों को पूर्णरूप से एक सामाजिक कर्ता के रूप में स्वीकार करते हुए उनके अपने अधिकारों की पहचान देती है। इस अधिवेशन में बच्चों का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार उनके मानसिक, भावनात्मक, लैंगिक, दैहिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ना व उपेक्षा से उनकी रक्षा करना है।
भारत में इस अधिवेशन को वर्ष 1992 में अंगीकृत किया गया और तब से बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए कई कानून व नीतियाँ बनाई गई हैं जिनमें सबसे महत्वपूर्ण 'किशोर न्याय अधिनियम 2000'' जो अपचारी बालिकाओं/बालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है तथा इसमें वर्ष 2006 में व्यापक संशोधन किया गया है।
जिन राष्ट्रों ने वर्ष 1989 में इस अधिवेशन को अंगीकृत व स्वीकृत किया है उन्हें यूनिसेफ द्वारा बच्चों के अधिकारों के संरक्षण व संवर्धन हेतु तकनीकी सलाह उपलब्ध करायी जाती है। यूनिसेफ द्वारा उ0प्र0 पुलिस को, जो कि भारत ही नहीं अपितु विश्व का सबसे बड़ा पुलिस बल है, ''बाल मित्र पुलिस बल'' के रूप में चिन्हित किया गया है। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के द्वारा भी अपने परिपत्र दिनांक 16.11.2009 के माध्यम से बच्चों का उत्पीड़न करने वालों के विरुध्द विधिक प्राविधानों के अन्तर्गत कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये हैं। श्री करमवीर सिंह, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश द्वारा अपने परिपत्र में कहा गया है कि बच्चे हमारे देश की अमूल्य निधि हैं और उनकी शारीरिक व मानसिक स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है। प्रदेश पुलिस द्वारा पूर्ण संवेदनशीलता के साथ बच्चों से सम्बन्धित प्रकरणों में कार्यवाही की जानी चाहिए तथा अपचारी बच्चों की गिरफ्तारी की सूचना उनके परिजनों व परिवीक्षाधिकारी को अविलम्ब दी जाय। उन्हें किसी भी परिस्थिति में हथकड़ी न लगाई जाय और न ही उन्हें पुलिस लाक-अप में रखा जाय।
बच्चे जिनके द्वारा कानून का उल्लंघन किया जाता है वे अक्सर सामाजिक परिस्थितियों व स्थिति का शिकार होते हैं, अत: उनके साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए, विशेषकर बालिकायें जिन्हें सुरक्षा व संरक्षण की विशेष आवश्यकता होती है। उ0प्र0 पुलिस द्वारा वर्ष 2008 से सितम्बर 2009 के मध्य बालकों के कल्याण के लिए सराहनीय कार्य किये गये हैं जिनमें बाल श्रमिक उन्मूलन अधिनियम के तहत मुक्त कराये गये बाल श्रमिकों की संख्या- 913, बरामद खोये बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द करने की संख्या- 4134 तथा लावारिस बच्चों के प्रशिक्षण व संरक्षण हेतु बाल सुधार गृहों में भेजने की संख्या- 191 है। परिक्षेत्रवार स्थिति निम्नवत् है:-
क्र0 सं0
परिक्षेत्र का नाम
मुक्त कराये गये बाल श्रमिकों की संख्या
बरामद खोये बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द करने की संख्या
लावारिस बच्चों के प्रशिक्षण व संरक्षण हेतु बाल सुधार गृहों में भेजने की संख्या
वर्ष-2008
वर्ष-2009
वर्ष-2008
वर्ष-2009
वर्ष-2008
वर्ष-2009
1
अलीगढ़
0
0
167
117
0
0
2
सहारनपुर
0
0
87
47
0
0
3
कानपुर
0
0
93
73
0
0
4
आगरा
373
241
302
179
1
12
5
मुरादाबाद
0
0
168
91
1
0
6
बरेली
0
0
189
88
0
0
7
इलाहाबाद
0
0
116
85
3
4
8
चित्रकूटधाम
0
0
30
25
0
0
9
मेरठ
22
229
195
305
0
3
10
आजमगढ़
15
4
76
35
0
0
11
मिर्जापुर
10
3
71
39
0
1
12
गोरखपुर
0
0
103
60
0
0
13
बस्ती
0
0
20
12
0
0
14
झांसी
0
0
12
3
0
0
15
लखनऊ
1
4
578
347
0
0
16
वाराणसी
0
0
113
45
81
61
17
फैजाबाद
0
0
129
60
0
0
18
देवीपाटन
0
0
40
25
14
10
19
रेलवे अनुभाग
4
7
8
1
0
0
कुल योग-
425
488
2497
1637
100
91
इस प्रकार उ0प्र0 पुलिस के द्वारा बाल अधिकारों के संरक्षण व संवर्धन हेतु वर्ष 2008, 2009 (माह सितम्बर 2009 तक) में सराहनीय कार्य किये गये हैं। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 32 के अधीन सैकड़ों की संख्या में बालकों को शोषण से मुक्त कराया गया है और दिग्भ्रमित/घर से रुष्ट होकर भागे हुए बच्चों को काफी संख्या में ढूढ़कर उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया है। बालिकाओं के संरक्षण व रक्षा हेतु महिला पुलिस को विशेषरूप से निर्देशित किया गया है कि ऐसी अपचारी बालिकाओं के साथ पूर्ण सहानुभूति व संवेदना से पेश आया जाये और किसी भी परिस्थिति में उनके प्रति हिंसात्मक दृष्टिकोण न अपनाया जाय।
बच्चों के अधिकारों के अधिवेशन की 20वीं वर्षगाँठ पर बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005, किशोर न्याय अधिनियम 2000 एवं 2006 के अवसर पर यूनिसेफ के प्रमुख श्रीमती अदिल कुद्र द्वारा बच्चों के अधिकारों के संरक्षण हेतु उ0प्र0 पुलिस द्वारा किये जा रहे सराहनीय कार्यों को स्वीकार करते हुए पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को बधाई देते हुए उ0प्र0 पुलिस को ''बालमित्र पुलिस'' के रूप में स्वीकार किया है और अपेक्षा व्यक्त की है कि किशोर न्याय अधिनियम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए पुलिस एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगी क्योंकि सबसे पहले पुलिस ही अपचारी बालक/बालिकाओं के सम्पर्क में आती है इसलिए पुलिस को बाल अधिकारों के संरक्षण व संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान अपेक्षित है। अधिवेशन की 20वीं वर्षगाँठ पर ''बालमित्र पुलिस'' के रूप में उ0प्र0 पुलिस द्वारा किये गये कार्यों की राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यूनिसेफ द्वारा सराहना की गयी है।
उ0प्र0 पुलिस द्वारा इस हेतु यूनिसेफ के सहयोग से बाल अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्ध्दन हेतु पम्पलेट व पोस्टर वितरित करके जनमानस में भी बालकों के प्रति उचित सम्मान तथा उनके अधिकारों के संरक्षण का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है।